Saturday, August 8, 2020
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महाराजा सुहेलदेव राजभर कौन थे । Who was Maharaja Suheldev Rajbhar

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महाराजा सुहेलदेव राजभर श्रावस्ती के अर्ध-पौराणिक भारतीय हिन्दू राजा थे। उन्होंने 11वीं शताब्दी की शुरुआत में बहराइच में सैयद सालार मसूद गाजी को पराजित कर मार डाला था। 17वीं शताब्दी के फारसी भाषा के ऐतिहासिक कल्पित कथा मिरात-ए-मसूदी में उनका उल्लेख है।

महाराजा सुहेलदेव राजभर की जीवनी( Who was Maharaja Suheldev Rajbhar)

श्रावस्ती सम्राट राष्ट्रीय वीर महाराजा सुहेलदेव राजभर का जन्म 1009 ई. को बहराइच में बसंत पंचमी के दिन हुआ था। इनके पिता का नाम बिहारीमल और माता का नाम जयलक्ष्मी था। महाराजा सुहेलदेव राजभर के अलावा तीन भाई और एक बहन थी। जिनका नाम रुद्रमल, बागमल,  सहारमल या भूरादेव तथा पुत्री अंबे देवी। महाराजा सुहेलदेव राजभर की शिक्षा-दीक्षा योग्य गुरुजनों के बिच संपन्न हुई।

अपने पिता बिहारीमल एवं राज्य के योग्य युद्ध कौशल विद्वानों की देखरेख मे महाराजा सुहेलदेव राजभर ने युद्ध कौशल, घुड़सवारी, शब्दवेदी वाण चलाना आदि की शिक्षा ली, महाराजा सुहेलदेव राजभर की बहुमुखी प्रतिभा एवं लोकप्रियता को देख कर मात्र 18 वर्ष की आयु मे सन् 1027 ई. को राज तिलक कर दिया गया और राजकाज मे सहयोग के लिए योग्य तथा राज्य की सुरक्षा के लिए योग्य सेनापति नियुक्त कर दिया गया।

महाराजा सुहेलदेव राजभर का साम्राज्य

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महाराजा सुहेलदेव राजभर

महाराजा सुहेलदेव राजभर का साम्राज्य उत्तर मे नेपाल से लेकर दक्षिण मे कौशाम्बी तक तथा पूर्व मे वैशाली से लेकर पश्चिम मे गढ़वाल तक फैला था। महाराजा सुहेलदेव राजभर का साम्राज्य 1027 ई. से लेकर 1077 ई. तक रहा। भूराय्चा का सामंत महाराजा सुहेलदेव राजभर का छोटा भाई भुरादेव था। जिसने अपने नाम पर भूराय्चा दुर्ग इसका नाम रखा। श्री देवकी प्रसाद अपनी पुस्तक राजा सुहलदेव राय मे लिखते है की भूराय्चा से भरराइच और भरराइच से बहराइच बन गया। प्रो॰ के. एल. श्रीवास्तव के ग्रन्थ बहराइच जनपद का खोजपूर्ण इतिहास के पृष्ट 61-62 पर अंकित है।

सैयद सालार मसूद गाजी और महाराजा सुहेलदेव राजभर का युद्ध

मुगल सम्राट जहांगीर (1605-1627) के शासनकाल के दौरान अब्द-उर-रहमान चिश्ती के द्वारा लिखी मिरात- ए- मसूदी के अनुसार महमूद गजनवी के भांजा सैयद सालार मसूद गाजी ने 16 वर्ष की आयु में सिंधु नदी को पार कर भारत पर आक्रमण किया और मुल्तान, दिल्ली, मेरठ और अंत में सतरिख पर विजय प्राप्त की। सतरिख में उन्होंने अपने मुख्यालय की स्थापना की और स्थानीय राजाओं को हराने के लिए सेनाओं को भेज दिया।

सैयद सैफ-उद-दीन और मियाँ राजब को बहराइच भेज दिया गया था। बहराइच के स्थानीय राजा और अन्य पड़ोसी हिंदू राजाओं ने एक संघ का गठन किया लेकिन सैयद सालार मसूद गाजी के पिता सालार साहू  के नेतृत्व में सेना ने उन्हें हरा दिया। उसके पिता सालार साहू का 4 अक्तूबर 1032 को सतरिख में निधन हो गया। उसके सन् 1033 में मसूद खुद बहराइच में उनकी प्रगति को जाँचने आया। सुहेलदेव राजभर के आगमन तक मसूद ने अपने दुश्मनों को हर बार हराया। अंत में सन् 1034 में सुहेलदेव राजभर की सेना ने मसूद की सेना को एक लड़ाई में हराया और मसूद की मौत हो गई।

1-सैयद सालार मसूद गाजी कौन था।

2- बाराबंकी शहर को एक राजभर राजा जस ने बसाया था

महाराजा सुहेलदेव राजभर किस जाति के थे।

महाराजा सुहेलदेव राजभर 17वीं शताब्दी के फारसी भाषा के ऐतिहासिक कल्पित कथा मिरात- ए- मसूदी के अनुसार सुहेलदेव “भर थारू” समुदाय से संबंधित थे। उसके बाद के लेखकों ने उनकी जाति को “भर राजपूत”राजभरथारू और जैन राजपूत के रूप में वर्णित किया है।

1950 और 1960 के दशक के दौरान बहुजन समाज पार्टी ने मूल रूप से दलित मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए सुहेलदेव मिथक का इस्तेमाल किया और सुहेलदेव को पासी राजा बताना शुरू किया। धीरे धीरे पासी समुदाय ने महाराजा सुहेलदेव को अपनी जाति से जोड़ने लगे।

बहराइच गजेटियर में राष्ट्रवीर महाराजा सुहेलदेव राजभर

बहराइच गजेटियर 278 पेज पढने के बाद पता चला कि भरों के बारे मे अलग अलग तथ्यों तथा अनेक राजभर राजाओं का इतिहास का उल्लेख 11 बार किया गया है जिसमें बहराइच गजेटियर पेज 116 तथा 117 मे महाराजा सुहेलदेव राजभर को ‘भर’ जाति का बताया गया है। तथा महाराजा सुहेलदेव जी को कुछ भर राजपूत भी मानते है जिससे लेखकों ने भरों से इनका तालुकात मानते है।

लेकिन महाराजा सुहेलदेव राजभर जी का इतिहास लिखने का सर्वप्रथम पावर बहराइच गजेटियर को है। क्योंकि किसी लेखक के पुस्तक कि विवादित मेटर कोर्ट मे गया तो सर्व प्रथम कोर्ट उस पुस्तक को बहराइच ही सर्च के लिए भेजेगा।

अगर महाराजा सुहेलदेव राजभर जी पर कोई फिल्म भी बनती है तो सर्वप्रथम सिर्फ बहराइच गजेटीयर ही सेंसर बोर्ड पर Objection ले सकता है और कोई नही लेगा। इसलिए महाराजा सुहेलदेव राजभर का इतिहास जानना है तो बहराइच गजेटियर जरूर पढ़ें।

वर्तमान में महाराजा सुहेलदेव राजभर के नाम पर क्या है।

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी

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सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भारत के मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में एक राजनीतिक क्षेत्रीय पार्टी है। इसकी स्थापना श्री ओमप्रकाश राजभर के नेतृत्व में सन् 2002 में महाराजा सुहेलदेव राजभर जी के नाम पर हुई थी। पार्टी का मुख्यालय वाराणसी जिले के फतेहपुर गांव में है। पार्टी का पीला ध्वज और छड़ी चुनाव चिन्ह है। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में भर/राजभर जाति की राजनीतिक आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के ख्याल से इसकी स्थापना की गई।

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से इस पार्टी की अधिक चर्चा इसलिए भी हुई क्योंकि बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की वाराणसी से जीत सुनिश्चित करने के लिए सभी समुदायों को साधने की नीति के तहत अपना दल के साथ ही सुभासपा जैसे छोेटे दलों से भी चुनावी तालमेल की दिशा में काम किया।

सुभासपा ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने 13 उम्मीदवार भी मैदान में उतारे थे। लेकिन बाद में इसके नेता ओम प्रकाश राजभर ने एकता मंच के बैनर तले छोटे दलों को एक सियासी गुलदस्ता तैयार किया और एनडीए की मदद की। 2014 के लोकसभा चुनाव में सुभासपा के 13 उम्मीदवारों को महज 118,947 वोट मिले। सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।

लेकिन एकता मंच बनाने वाले ओम प्रकाश राजभर की सियासी गाड़ी चल पड़ी। 2012 के विधानसभा चुनाव में मुंह की खाने वाली पार्टी के 4 प्रत्याशी 2017 में विधानसभा पहुंच गए। ओम प्रकाश राजभर योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री बन गए। एनडीए के साथ समझौते में पार्टी को 8 सीटें मिली थी, जिनमें से 4 पर उनकी जीत हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से ओम प्रकाश राजभर कि बाते न मानने के कारण विवाद हो गया जिससे ओमप्रकाश राजभर NDA से अलग हो गये।

उनकी बस राज्य सरकार से यही मांग थी जो पिछड़े वर्ग से जातिया जो आरक्षण का लाभ नहीं ले पायी उनके लिये अलग से आरक्षण कि व्यवस्था करना जिसका उत्तर प्रदेश कि सरकार इस बात को नहीं मानी जिसके कारण ओम प्रकाश राजभर जी ने कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।

सुहेलदेव सुपरफास्ट एक्सप्रेस

Suheldev-Super-Fast-Express महाराजा सुहेलदेव राजभर कौन थे । Who was Maharaja Suheldev Rajbhar
सुहेलदेव सुपर फास्ट एक्सप्रेस

महाराजा सुहेलदेव राजभर जी के नाम पर ही सुहेलदेव  सुपरफास्ट एक्सप्रेस आनंद विहार टर्मिनल रेलवे स्टेशन से गाजीपुर सिटी उत्तरी रेलवे से जुड़ी एक सुपरफास्ट ट्रेन चलाई गई। जो भारत में गाजीपुर शहर और आनंद विहार टर्मिनल के बीच चलती है। यह वर्तमान में 22419/22420 ट्रेन नंबरों के साथ सप्ताह के आधार पर चार दिनों के साथ संचालित किया जा रहा है।

महाराजा सुहेलदेव राजभर पर डाक टिकट जारी

Suheldev-Indian-post-ticket महाराजा सुहेलदेव राजभर कौन थे । Who was Maharaja Suheldev Rajbhar
माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा महाराजा सुहेलदेव राजभर जी के नाम पर डाक टिकट जारी करते हुए

29 दिसंबर 2018 को माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा गाजीपुर में महाराजा सुहेलदेव राजभर के नाम पर डाक टिकट जारी किया गया था। महाराजा सुहेलदेव 11वीं सदी में श्रावस्ती के सम्राट थे। सुहेलदेव ने महमूद गजनवी के भांजे सालार मसूद को मारा था। भर/राजभर जाति के लोग उन्हें अपना वंशज मानते हैं।

जिनका पूर्वांचल के कई जिलों में खासा प्रभाव है। महाराजा सुहेलदेव राजभर कौन थे। बीजेपी और हिंदूवादी संगठन सुहेलदेव को हिंदू राजा के तौर पर चित्रित करते हैं। प्रदेश सरकार में भाजपा के सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तरप्रदेश में मंत्री ओमप्रकाश राजभर सुहेलदेव को राजभर बताते हैं।










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My name is Rameshwar Rajbhar Mau utter pradesh

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