Savitribai Phule Biography In Hindi ।। सावित्रीबाई फुले की जीवनी हिंदी में

0
48
सावित्रीबाई फुले का मुख्य सामाजिक कार्य

  1. 1852 में उन्होंने दलित बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की थी।
  2. 28 जनवरी 1853 को बाल हत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की।
  3. उन्होंने विधवा पुनर्विवाह का आयोजन किया। जिसमें महिलाओं सम्बंधित समस्याओं का समाधान किया जाता था।
Savitribai Phule Biography In Hindi ।। सावित्रीबाई फुले की जीवनी हिंदी में
आज ही के दिन भारत की पहली महिला शिक्षक और समाजिक कार्यकर्ता सावित्रीबाई फूले(Savitribai Phule) का जन्म हुआ था। सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नायगांव में एक दलित परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम खन्दोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मी था। 10 साल की उम्र में 1840 में उनकी शादी समाजसेवी महात्मा ज्योतिराव फुले संग करा दिया गया था। जिस उम्र में बच्चे खेलते कुदते है और परियों की कथाएं सुनते हैं उसी उम्र में सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) शादी के बंधन में बंध गईं। 
savitribai%2Bphule%2Bbiography%2Bin%2Bhindi2 Savitribai Phule Biography In Hindi ।। सावित्रीबाई फुले की जीवनी हिंदी में
 
सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) की जब शादी हुई तो वह पढ़ी लिखी नहीं थीं न ही वह पढ़ना लिखना जानती थी। चुंकि वह दलित परिवार से थी इसलिए उस समय उंची जाति के लोगों ने उन्हें पढ़ने ही नहीं दिया।
लेकिन उनके पति ज्योतिराव फुले ने उन्हें पढ़ने लिखने में मदद की । वह उन्हें घर पर ही पढ़ाते थे। प्राईमरी स्तर की पढ़ाई घर पर ही पुरी करने के बाद , सावित्रीबाई फूले(Savitribai Phule) के दो मित्रों ने उनकी आगे की पढ़ाई में साथ दिया।इसके बाद उन्होंने शिक्षकों की ट्रेनिंग के लिए दो प्रोग्रामों में हिस्सा लिया।
शिक्षिका की ट्रेनिंग पुरी करने के बाद सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) ने पुणे के एक स्कूल में छात्रों को पढ़ाना शुरू किया। जब वह स्कूल में पढ़ाने जाती थी तो उनके ऊपर गाय का गोबर और किचड़ फेंका जाता था।
1848 में पुणे के भिड़ेवाड़ी इलाके में अपने पति के साथ मिलकर विभिन्न जातियों के छात्राओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना किये। इसके बाद सिर्फ एक साल में सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) और ज्योतिराव फुले पांच नए विद्यालय खोलने में सफल हुए। पुणे में पहला स्कूल खोलने के बाद फुले दम्पति ने 1851 में पुणे के रास्ता पेट में लड़कियों का दूसरा स्कूल खोला और 15 मार्च 1852 में बताल पेठ में लडकियों का तीसरा स्कूल खोला।
लोगों के विरोध और उनके सामने समस्याएं खड़ी करने के बावजूद उन्होंने उस क्षेत्र में 18 स्कूल खोले थे। महिला शिक्षा के लिए काफी काम किया। ऐसे वक्त में जब महिलाओं की शिक्षा को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता तब सावित्रीबाई फूले(Savitribai Phule) ने महिलाओं के लिए स्कूल खोला था।
savitribai%2Bphule%2Bbiography%2Bin%2Bhindi3 Savitribai Phule Biography In Hindi ।। सावित्रीबाई फुले की जीवनी हिंदी में
सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) ने स्कूल में छात्रों को पढ़ाने के साथ साथ समाज में व्याप्त बुराईयों के खिलाफ भी लड़ाई लड़ी।उन्होंने 28 जनवरी 1853 को बाल हत्या प्रतिबंधक गृह की स्थापना की। उन्होंने विधवा पुनर्विवाह का आयोजन किया। जिसमें महिलाओं सम्बंधित समस्याओं का समाधान किया जाता था।
उनकी बनाई हुई संस्था ‘सत्यशोधन समाज’ ने 1876 और 1879 के आकाल में अन्न सत्र चलाया और अन्न इकट्ठा करके आश्रम में रहने वाले 2000 को खाना खिलाने की व्यवस्था की।
भारत की प्रथम कन्या विद्यालय की पहली महिला शिक्षिका होने का गौरव भी सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) को प्राप्त है उन्हें आधुनिक मराठी काव्य का अग्रदूत कहा जाता है।उन्होंने देश के पहले किसान स्कूल की स्थापना भी की थी।
savitribai%2Bphule%2Bbiography%2Bin%2Bhindi Savitribai Phule Biography In Hindi ।। सावित्रीबाई फुले की जीवनी हिंदी में
सन् 1890 में ज्योतिराव फुले की मृत्यु के बाद सावित्रीबाई फुले(Savitribai Phule) ने उनके अधुरे सपनों को पूरा करने का काम किया।1897 में सावित्रीबाई फुले(savitribai phule) की मृत्यु प्लेग के मरीजों की देखभाल करने के दौरान इंफेक्शन से हुई।
savitribai phule biography in hindi

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here