राकेश राजभर के द्वारा सरकार पर लिखी कविता एक बार जरूर पढ़ें

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वो देश बेचकर वफादार हो गए
हम सवाल पूछकर गद्दार हो गए।

अब वही आपको पराये लगने लगे
जिनके वोट से आप सरकार हो गए।

कुर्सी के खातिर क्या करोगे साहब
हद से ज्यादा आप मक्कार हो गए।

वादा था शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार का
अब दुर्दशा ही सबके उपहार हो गए।

कुछ निर्णय का हम स्वागत करते हैं
कुछ जवाब दो जो वादे बेकार हो गए।

लेखक-राकेश राजभर

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