Wednesday, October 28, 2020
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Fruit merchant Story || फलों का व्यपारी || प्रेरणादायक कहानी

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Fruit merchant  Story-  फलों का व्यपारी(प्रेरणादायक कहानी )

एक बार की बात है। एक महात्मा अपने शिष्य के साथ एक गाँव से गुजर रहा था। उन दोनों को बहुत भूख लगी थी। पास में ही एक घर था। दोनों घर के पास पहुँच गये, और दरवाज़ा खटखटाया।
घर के अंदर से एक आदमी बाहर निकला। जिसने फटे पुराने कपडे पहने हुए थे। महात्मा ने उससे कहा – हमे बहुत भूख लगी हुई है। क्या हमे खाना मिल सकता है। उस आदमी ने उन दोनों को खाना खिलाया।
खाना खाने के बाद उस महात्मा ने कहा – तुम्हारे खेतों की ये जमीन बहुत ही उपजाऊ लग रही है। लेकिन तुम्हारी फसलों को देखकर लगता है की तुम खेत पर ज्यादा ध्यान ही नहीं देते, और तुमने अपने खेत में ज्यादा फसल भी नहीं बोई है।
तुम्हारा गुजारा कैसे होता है। उस आदमी ने कहा – हमारे पास एक भैंस। जो काफी दूध देती है। उस दूध से हमारा गुजारा हो जाता है। रात होने लगी थी इसलिए दोनों के दोनों वही पर रुक गये।
रात को उस महात्मा ने अपने शिष्य को उठाया और कहा – चलो हमे अभी ही यहाँ से चलना है। और चलने से पहले हम उस आदमी की भैंस को चट्टान से गिराकर मार डालेंगे।
शिष्य को गुरु की इस बात पर यकीन नहीं हो रहा था। लेकिन वह उनकी बात को टाल भी नहीं सकता था।
वे दोनों उस आदमी की भैंस को मारकर रात को ही वहाँ से चले गये। यह बात उस शिष्य के मन में खटकती रही। कुछ सालो बाद जब वह सफल आदमी बन गया तो उसने सोचा की क्यों न उस आदमी से मिला जाये। और अपनी गलती को सुधारने के लिए उसकी मदत की जाये।
वह शिष्य उस खेत के पास पहुँचा। उसने देखा की वहा खाली पड़े खेत अब फलों के बगीचों में बदल चुके थे। उसे लगा की भैंस के मरने के बाद वह आदमी सब कुछ बेचकर चला गया होगा।
यह सोचकर वह वापस लौटने लगा। तभी उसने उस आदमी को देखा। वह उसके पास जाकर बोला – शायद आपने मुझे पहचाना नहीं। सालो पहले मैं अपने गुरु के साथ आपसे मिला था।
हाँ मुझे याद है। कैसे भूल सकता हूँ, उस दिन को। तुम लोग तो बिना बताये ही चले गए थे। उस रात न जाने कैसे हमारी भैंस चट्टान से गिरकर मर गयी।
उस शिष्य ने पूछा – उसके बाद आपने क्या किया। उस आदमी ने बताया की पहले तो हमारी समझ में नहीं आया की क्या करे। लेकिन जीने के लिए कुछ तो करना ही था।
पहले तो मैं जंगल से लकड़ियाँ काटकर उन्हें बाजार में बचने लगा। उससे कुछ पैसे मिले तो मैंने बीज खरीद कर खेतो में बो दिये। उस साल फसल भी अच्छी हो गयी।
उससे जो पैसे मिले उन्हें मैंने फलों के बगीचे लगाने में इस्तेमाल किया। यह काम बहुत ही अच्छा चल रहा है। और इस समय मैं फलों का सबसे बड़ा व्यापारी हूँ।
मैं कभी कभी सोचता हूँ की यह सब कुछ ना हुआ होता अगर उस रात भैंस की मौत ना हुई होती।
शिष्य ने उससे पूछा – यह काम आप पहले भी तो कर सकते थे। उस आदमी ने कहा – हाँ मैं कर सकता था। लेकिन मेरी जिंदगी बिना मेहनत के ही चल रही थी। मुझे कभी लगा ही नहीं की मैं इतना कुछ कर सकता हूँ।
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My name is Rameshwar Rajbhar Mau utter pradesh

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