सात दशक बाद भी हमें वो सब क्यों नहीं मिला जिसके वास्तव में हम सब हकदार थे- अरून राजभर

पिछड़ों का वोट लेकर इन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता था और वही कार्य आज भी हो रहा है।

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सुहेलदेव भारती समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण राजभर  ने  मिडिया से बात करते हुए कहा कि भारत को आजादी मिले 73 साल हो गए । 26 जनवरी 1950 को हमें लोकतांत्रिक आजादी मिली थी। 1952 से चुनाव शुरू हो गए थे और उसी समय से हमें संवैधानिक आजादी के साथ-साथ समानता का अधिकार भी मिला लेकिन 7 दशक बाद भी हमें वो सब क्यों नहीं मिला जिसके वास्तव में हम सब हकदार थे।

अरुण राजभर ने कहा इन 7 दशकों में केंद्र और राज्यों में तमाम दलों की सरकारें आती जाती रहीं लेकिन दुर्भाग्य यह रहा हमेशा से ही अतिपिछड़ा, अतिदलित, अल्पसंख्यक समुदाय को सिर्फ सत्ता प्राप्ति का साधन मात्र समझा गया। जब जब सत्ता की जरूरत पड़ी तब तब इन लोगों को कभी पूरा न होने वाले सपने दिखाकर,झूठे वादों में फंसाकर राजनैतिक रसूखदारों ने सिर्फ इनका वोट लेकर इन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा और वही कार्य आज भी हो रहा है।

अरून राजभर ने कहा कि सरकार द्वारा पिछडा वर्ग प्रकोष्ठ का निर्माण सिर्फ पिछड़े वर्गों को लालीपाप दिखाकर पिछडों का हिस्सा एवं उनके अधिकारों को लूटने के लिए किया गया है। उसी प्रकार भेड़ कला बोर्ड, माटी कला बोर्ड, अल्पसंख्यक कल्याण आयोग जैसे विभिन्न समुदायों के नाम पर आयोग तथा बोर्डों का गठन करके इन समुदायों के अधिकारों को लूटने का कुचक्र सरकार आज तक करती रही है।

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