Wednesday, October 28, 2020
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भागीदारी संकल्प मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस, भाजपा पिछड़ों की दुश्मन ओमप्रकाश राजभर

वर्तमान सरकार बड़ी चतुराई से वंचितों को नौकरी में जाने से रोकने के लिए सरकारी विभागों को प्राइवेट हाथों में बेच रही है

आज दिनांक 15 फरवरी 2020 दिन शनिवार को भागीदारी संकल्प मोर्चा द्वारा लखनऊ में  प्रेस कॉन्फ्रेंस रखा गया था जिसमें दो और पार्टियों की भागीदारी संकल्प मोर्चा में शामिल होने की घोषणा की गई ओमप्रकाश राजभर ने कहा भागीदारी संकल्प मोर्चा की रैली को सफल बनाने के लिए आज हमारे साथ भारतीय वंचित समाज पार्टी भी हाथ मिला रही है इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय रामचन्द्र कश्यप जी है। इससे पहले केवट रामधनी बिंद की पार्टी हाथ मिला चुकी है जिसकी घोषणा आज की गयी दोनों पार्टियों का ओमप्रकाश राजभर ने हृदय से स्वागत किया। अब भागीदारी संकल्प मोर्चा में कुल पार्टियों की संख्या पांच से बढ़कर सात हो गयी है ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि आगे और भी क्षेत्रीय पार्टिया सम्पर्क में हैं जो आने वाले समय में भागीदारी संकल्प मोर्चा से हाथ मिला सकते हैं

उन्होंने ने कहा कि बात तो सभी दल गरीबों , दलितों , और पिछड़ों की विकास की करते हैं । अल्पसंख्यकों के मसीहा बनते हैं किन्तु आजादी के 73 वर्ष बाद भी दलितों के आरक्षण का कोटा पुरा नहीं हुआ दलितों का आर्थिक एवं सामाजिक उत्थान नहीं हो पाया। पिछड़ों के आरक्षण का कोटा 27% परन्तु अभी तक मात्र 6% लोगों को आरक्षण का लाभ मिल सका है जबकि उनकी संख्या 52% से भी अधिक है और अब तो पिछड़े वर्ग का आरक्षण समाप्त ही कर दिया गया है प्रमोशन में आरक्षण समाप्त किया जा रहा है दलितों , पिछड़ों को नौकरियां में उच्च पदों में जाने से रोका जा रहा है केन्द्र सरकार की बदनियती के कारण उच्च न्यायालय में दलितों और पिछड़ों के पक्ष को ठीक से नहीं रखा गया जिसकी वजह से पदोन्नति में उच्च न्यायालय ने राज्यों के विवेक पर छोड़ दिया है भागीदारी संकल्प मोर्चा की मांग है कि केन्द्र सरकार कानून बनावे और कानून बनाकर के पिछड़े , दलितों के जो आरक्षण को उनके विवेक पर छोड़ रखा है व्यवस्था दें।

वर्तमान सरकार बड़ी चतुराई से वंचितों को नौकरी में जाने से रोकने के लिए सरकारी विभागों को प्राइवेट हाथों में बेच रही है रेल , हवाई अड्डा सब उद्योगपतियों को बेंच दिया। HLM , ONGC जैसी कम्पनियों को बेचने के मन्शा से घाटे में लाया जा रहा है। LIC में सरकार अपनी हिस्सेदारी बेच रही है देश को आर्थिक रूप से तबाह किया जा रहा है। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में अध्यापकों की कमी के कारण पढ़ाई नहीं हो रही है बच्चों को मिड डे मील में उलझाकर रखा गया है सरकारी स्कूलों का काम केवल खिचड़ी पकाने , खिलाने तक सिमित रह गया है प्राथमिक स्कूल शिक्षा की नींव है और साजिश के तहत इसे बर्बाद किया जा रहा है भागीदारी संकल्प मोर्चा की चाहत है कि पुरे देश में शिक्षा का पाठ्यक्रम एक हो चाहे वह प्राइवेटस स्कूल हो या सरकारी।

भाजपा सरकार गरीबों , पिछड़ों को कर्मकांडो और अन्ध विश्वासों में उलझाई है नौकरी की बात नहीं कर रहीं हैं , कारखानों का निर्माण नहीं किया जा रहा है सिर्फ बांटों और राजनीति करो की नीति अपनाई जा रही है भाजपा सरकार का नारा है “सबका साथ सबका विकास” किन्तु थाने में , जिलें में पदों पर दलितों , पिछड़ों को पोस्टींग से वंचित रखा गया है भारत दुनिया का पहला देश है जहां पर शिक्षा और स्वास्थ्य को भी प्राइवेट क्षेत्र को दिया जा रहा है

 उत्तर प्रदेश सरकार छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति देने की भी भेदभाव कर रही है वर्ष 2019-20 में समान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं की संख्या सात लाख है पिछड़े वर्ग की संख्या 21 लाख है समान्य वर्ग के छात्रों को छात्रवृत्ति की बजट 609 करोड़ आवंटित किया गया है और पिछड़े वर्ग को मात्र 600 करोड़ जबकि संख्या अनुपात के हिसाब से पिछड़े वर्ग को 2027 करोड़ का बजट आवंटित किया जाना चाहिए था। पिछड़े वर्ग को विभिन्न पाठ्यक्रमों में 10 से 30 हजार रुपए शुल्क प्रतिपूर्ति दी जा रही है जबकि समान्य वर्ग में सभी छात्रों को सभी पाठ्यक्रमों में 50 हजार रुपए दिया जा रहा है यह सरकार पिछड़ा वर्ग दलित विरोधी है भागीदारी संकल्प मोर्चा यह चाहती हैं कि दलितों , पिछड़ों को भी समान्य वर्ग की तरह सभी पाठ्यक्रमों में 50 हजार रुपए शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में दिया जाये। 2018-19 के बजट में पिछड़े वर्ग की छात्रों की संख्या 18 लाख 50 हजार थी तो 878 करोड़ बजट आवंटित किया गया था भाजपा इस बार 278 करोड़ घटा दी जबकि नियम है कि हर साल 10-15% बजट बढ़ाया जाये इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार पिछड़ों की दुश्मन है पिछड़ों को हिस्सा नहीं देना चाहती है पिछड़ों को गुमराह करके वोट लेना चाहती है।भागीदारी संकल्प मोर्चा चाहती है कि सबको एक समान शिक्षा मिले , शिक्षा गुणवत्ता परक हो , हर वर्ग को उनकी संख्या के आधार पर भागीदारी मिले। पब्लिक एंव प्राइवेट दोनों ही सेक्टरों में संख्या के आधार पर आरक्षण का प्रावधान हो , किसानों को उनके पैदावार का मूल्य निर्धारण का अधिकार मिले जिससे उसकी उपज का सही दाम मिल सके ।

भागीदारी संकल्प मोर्चा का एक नारा है

जिसकी जितनी संख्या भारी,उसकी उतनी हिस्सेदारी।

Bhagidari Sankalp Morcha

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My name is Rameshwar Rajbhar Mau utter pradesh

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